संविदा कर्मियों ने रायपुर के मुख्य स्वास्थ्य चिकित्सा अधिकारी के समक्ष दिया सामूहिक त्याग पत्र

संविदा कर्मियों ने रायपुर के मुख्य स्वास्थ्य चिकित्सा अधिकारी के समक्ष दिया सामूहिक त्याग पत्र

रायपुर न्यूज / नियमितीकरण सहित 10 सूत्रीय मांगों को लेकर बीते 18 दिनों से हड़ताल पर बैठे स्वास्थ्य विभाग के एनएचएम संविदा कर्मचारी गुरुवार को उग्र हो गए, छ ग प्रदेश अध्यक्ष डॉ अमित मिरी द्वारा बताया गया कि अपनी दस सूत्रीय मांगों को लेकर विगत अगस्त माह से संविदा एन एच एम स्वास्थ्य कर्मचारी लोकतांत्रिक व्यवस्था में संविधान प्रदत्त मूल अधिकारों के दायरे में रहकर आंदोलनरत रहे हैं आंदोलन 160 बार ज्ञापन देने के पश्चात जब शासन प्रशासन में किसी प्रकार सुनवाई ना होने तथा आंदोलन के दौरान सोशल मीडिया वाटसाप पर चेतावनी पत्र / वाटसाप पर बर्खास्तगी करने के आदेश मिलने पर यह मालूम होते प्रतीत हुआ कि मांगों के निराले करने में सक्षम नजर नहीं आ रहें हैं इसी आस्य को लेकर छ ग प्रदेश एवं एच एम कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ अमित मिरी माननीय मुख्यमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप करने कि अपील किए जाने पश्चात प्रशासन संवाद स्थापित करने के इस प्रयास में बाधा बनते हुए बर्खास्तगी के पत्र कर्मचारियों को जारी कि गई प्रशासन की यह दमनकारी पूर्वक कार्यवाही पूरी तरह से अनुचित है साथ ही प्रदेश अध्यक्ष मिरी ने बताया दमनपूर्ण कार्यवाही का हम सभी 16 हजार एन एच एम संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी विरोध करते हुए आक्रोशित होकर सामूहिक त्याग पत्र देने को विवश हैं इसी क्रम में कई जिलों में कर्मचारियों को बर्खास्त करने की कार्रवाई के विरोध में जिले के एनएचएम कर्मियों ने सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया, प्रांतीय टीम के निर्देश पर मुंगेली जिले के तीनों ब्लॉकों से कर्मचारी जिला मुख्यालय स्थित आगर खेल परिसर में जुटे यहां सभी हड़ताली कर्मचारियों ने एक स्वर में सामूहिक त्याग पत्र पर हस्ताक्षर किए और प्रतिनिधि मंडल ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को इस्तीफे सौंपे।

इस दौरान कर्मचारियों ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर उदारतापूर्वक विचार कर लिखित आदेश जारी नहीं किए गए तो आंदोलन और तेज किया जाएगा कर्मचारियों का कहना है कि वे नियमितीकरण, 27% लंबित वेतन वृद्धि और अन्य 10 सूत्रीय मांगों को लेकर 18 अगस्त से बेमियादी हड़ताल पर हैं। संविदा कर्मियों के हड़ताल पर चले जाने से जिला अस्पताल सहित समस्त स्वास्थ्य केंद्रों में सेवाएं प्रभावित हो गई हैं। मरीजों को घंटों ओपीडी में लाइन में खड़ा होना पड़ रहा है।संघ के जिला अध्यक्ष पवन निर्मलकर ने कहा कि भाजपा ने चुनाव से पहले ‘मोदी की गारंटी’ के तहत नियमितीकरण का वादा किया था, लेकिन सत्ता में आने के दो साल बाद भी इसे पूरा नहीं किया गया। 
कोविड-19 महामारी के दौरान जान जोखिम में डालकर काम करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों की आज अनदेखी की जा रही है। आंदोलनकारियों का कहना है कि सरकार दमनकारी रवैया अपनाकर बर्खास्तगी जैसे आदेश निकाल रही है, जबकि कर्मचारी अपनी जायज मांगों को लेकर लड़ाई लड़ रहे हैं। आक्रोशित कर्मियों ने साफ कहा है कि वे किसी भी हाल में पीछे हटने वाले नहीं हैं और इस बार कि आंदोलन आर-पार की लड़ाई है ।